शिव रुद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥१॥  मैं नमस्कार करता हूँ उस शमीशान को जो निर्वाणरूप हैं, सर्वव्यापी विभु हैं, ब्रह्म और वेद के स्वरूप हैं। स्वयंभू, निर्गुण, निर्विकल्प, निरीह, चिदाकाश के समान आकाश में विराजमान—उन्हें मैं भजता हूँ। निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयंगिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् करालं महाकालकालं कृपालंगुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥२॥           2निर्मल आकाररहित, ओमकार के मूल, […]

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शुभ प्रभात 🙏

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ यह मंत्र सभी कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए है। आज की तिथि : 04 जनवरी, 2026 रविवार – माघ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा ( 12:30 pm तक), उसके बाद द्वितीया| अभी, तिथि है प्रतिपदा |              धन्यवाद् 🙏🙏

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🪷भक्ति क्या है? – What is Bhakti?

💥जीवन के हर पल में भक्ति का प्रकाश (Spreading the Light of Devotion in Every Moment of Life) 🪔 परिचय | Introduction हम सभी जीवन में कभी न कभी शांति, प्रेम और आत्मिक सुख की तलाश करते हैं। कुछ लोगों को यह धन में दिखता है, कुछ रिश्तों में — लेकिन सच्चा सुख उस समय

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